हे ईश्वर!
सुनलंहु - बूढ़-पुरान सं
सदिखन,
पढ़लंहु – पोथियो में
ठाम-ठाम
जे
व्यापित छह तों अपने
अपन सभ रचना में,
प्रकृतिक कण-कण में
समायल छह तों.
फेर तS,
जखन-जखन कियो हंसैछ-
तोंही हँसैत छह,
जखन-जखन कियो कनैछ-
तोंही कनैत छह,
जखन कियो नीक करैछ-
तोंही करैत छह,
जखन कियो अधलाह करैछ-
तोंही तS करैत छह.
फेर तS,
जं ‘राम’ में तों छलाह-
तं ‘रावणों’ में,
जं ‘मोहम्मद’ में तों छलाह-
तं ‘जहलो’ में,
जं ‘ईसा’ में तों छलाह-
तं ‘फ़िरऔनो’ में.
हे ईश्वर!
यदि तों सृष्टि नियंता छह
तS
एना कियैक होइछ?
कियैक तों सदिखन
‘राम’, ‘मोहम्मद’, आ ‘ईसे’ नहिं होइत छह?
प्रणव कान्त. ०२ जनवरी, २०१३.
सुनलंहु - बूढ़-पुरान सं
सदिखन,
पढ़लंहु – पोथियो में
ठाम-ठाम
जे
व्यापित छह तों अपने
अपन सभ रचना में,
प्रकृतिक कण-कण में
समायल छह तों.
फेर तS,
जखन-जखन कियो हंसैछ-
तोंही हँसैत छह,
जखन-जखन कियो कनैछ-
तोंही कनैत छह,
जखन कियो नीक करैछ-
तोंही करैत छह,
जखन कियो अधलाह करैछ-
तोंही तS करैत छह.
फेर तS,
जं ‘राम’ में तों छलाह-
तं ‘रावणों’ में,
जं ‘मोहम्मद’ में तों छलाह-
तं ‘जहलो’ में,
जं ‘ईसा’ में तों छलाह-
तं ‘फ़िरऔनो’ में.
हे ईश्वर!
यदि तों सृष्टि नियंता छह
तS
एना कियैक होइछ?
कियैक तों सदिखन
‘राम’, ‘मोहम्मद’, आ ‘ईसे’ नहिं होइत छह?
प्रणव कान्त. ०२ जनवरी, २०१३.
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