दस बरख'कओ 'छोटुआ'
(अस्सल ना' त' ओकरो कहाँ छै अखियास)
आइयो
भोरे सं मोस्तैज छै
'दिल्ली जलपान घर' क
मोरी में घसैत
अंइठ बर्तन-बासन
आ
ग़ल्ला पर बैसल
ओकर सेठ
बिक्खिन गारि सं होलियौने छै ओकरा
एकटा पंचटकही
शीशा कें गिलास टुटला सन्ता।
दोकान'क
सोझे-सिमाने
पाँचसितारा अस्पताल'क
बनैत इमारत'क डेराओन सीढ़ी पर
उप्पर-निच्चां करैत
माथ पर पजेबा'क थाक
उघैत नौजुआन दुलरिया,
माथ सं टघरैत पसीना में
आइयो
बहेने जा रहल छै
कतेको आँखि'क मैल के
आ
ओ की बुझैत नहि छै
जे किएक
साँझू पहर 'रोज़' बाँटैकाल
ओकर पंहुचा पकड़' चाहै छै
ओकर
अधबयसू ठीकेदार!
दुखित रहितो
भोरे-भोर
निकलल रहै ओ
ठेला ल'
जे कने बेसी कैंचा कमा लितै आई,
से की जाने गेलै
जे
कोन सक्कत सरदार जी सं पाला पड़लै,
ओ लादि देलकै दू लदान'क माल-
एक्कहि बेरि
ताहि पर
ओतेक हुज्जति'क बादो
कहाँ देलकै उचित मजूरी
असोथकित भ' बैसल
सोचि रहल छै - रामकिसुन।
से
ओ छोटुआ हो,
दुलरिया हो
आकि रामकिसुन
कहाँ बुझैल छै ककरो
जे
आई कियैक तै' कयने छै सरकार -
कोनो 'मजूर दिबस'
आकि
बगल'क
बड़का टी. भी'क दोकान'क
रंग-बिरंग'क, छोटका-बड़का परदा पर
झक्क उज्जर पैजामा-कुरता
पहिरने नेता सभ
अपने में कटांउझ करैत
कियैक उड़ा रहल छै थूक
मार्क्स, लेलिन, स्तालिन, माओ, बर्ज़ुआ
साम्यवाद, समाजवाद, विकासवाद
किदन-कहांदन चिचियाइत।
छोटुआ कें त'
मतलब छै
पाँच टका कम भेंट'बला दिहाड़ी सं
जाहि सं
ख़रिदतै औखधि ओ
पथरी के दरद सं बेचैन माय लेल।
दुलरिया फेर
आईयो सहतै
साँप सन सहसहाइत आंगुर
बज्जरखसुआ ठीकेदार'क -
मजूरी लेल
जाहि सं
अओतै ओकर मुनियां'क किताब-कॉपी-पिलसिन
ताकि
पढ़ि-लिखि बनतै ओ एहने कोनो
हॉस्पीटल'क
साफ़, सुन्नर सन सिस्टर।
रामकिसुन भरोदिन
सहतै हुज्जति आ अनेती
कोनो मारवाड़ी, पंजाबी आकि गुजराती सेठ'क
चारि कैंचा लेल
जाहि सं जुरतै
ओकरा घर'क चौका,
कि
धिया-पुता'क लत्ता-कपड़ा
आकि
टका-टका जोड़ि
भ' सकै त' पूर भ' जाई ओकर
दस बाइ दस के एकटा अप्पन झुग्गी'क सपना।
छोटुआ हो कि दुलरिया आकि रामकिसुन,
ओकरा की मतलब
जे कियैक बन्न रहै छै
आजु'क दिन
बड़का-बड़का ऑफ़िस आ बैंक सभ
आ
भरल रहै छै चमचमाइत मॉल, मल्टीप्लेक्स
'मजूर दिबस'क ना' पर।
- प्रणव कान्त झा
०१ मई, २०१६.