मंगलवार, 21 फ़रवरी 2017

मैथिली रचना - ३८

विसर्ग होइत स्वर
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ओना तं
सेनुर छिटकबैत भोर सं
झामर होइत अन्हरिया राति धरि
खपेने रहैत छथि ओ अपना कें
सबह'क खगता पूर करैत।
सौंसे घर-परिवार, पाबनि-तिहार, रीति-रेबाज
अंगेजने रहैत छथि ओ
जेना एकसर हुनके टेकने
बांचल रहि जायत -
कुलक मान आ मरजाद।
हुनके
सिनेह'क गढ़गर मांटि सं
नीपल-छछारल आँगन-घर'क 
एकहक कोन में
मिज्झर भेल देखा पड़ती ओ
सदिखन।
बिखम सं बिखम परिस्थिति में
करैत छथि निमाह
एकहक सर-संबंध कें
बनबैत छथि जिबन्त
जेना
एकटा मूल स्वर करैत अछि पूर्ण
वर्णमालाक
एकहक स्वर आ व्यंजन कें।
मुदा
जखन बेर अबैछ
हुनक अस्तित्व'क पहिचान कें
त'
अनेरे अबडेरि देल जाइत रहली कात 
जेना होथि ओ अयोगवाह।
आओर
आब अहि उमेरक अवसान में
सहजें बहटारल सेहो जा रहलथि
एनमेन विसर्ग जकां 
ओ कुल-भाखा'क - मूल स्वर।

- प्रणव नार्मदेय
२० फ़रवरी, २०१७.

मैथिली रचना - ३७

प्रेम छह तों
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आत्ममुग्धता
अहं कें पांखि ल' 
ओ उड़ैत रहल सगरो
मोन में छिट्टा भरि घृणा भरने -
सबहक लेल।
आत्मबोधक संग
भरि-भरि बाकुट नेह
छिटैत रहलहुं हम सदिखन
हिय में आस'क अमार लेने - 
दिन फिरबाक।
साइत कोनो खन
बैसि गेल रहय अनचोके ओ
हम्मर सिनेहक जजाति बीच
त'
सोहरओने रही हम - आत्मा ओकर
नेहक संग
अंगेजि लेने रहय ओहो - सगर गात हमर
कोनो मात्सर्जें।
से 
जेना कामना'क 
चरम सं उपजल सुन्न में
लौकैत हो ब्रह्म खन भरिक लेल,
तहिना
ओक्कर घृणा सं किछु खन खलियायल सुन्न में 
जोगओलहुं जे नेह'क एक टुकड़ा इजोत;
ओही सं जनमल - निस्सन प्रेम छह तों।
से हे!
बरू अंगेजने रहिह' ओहि सुन्न कें सदति
भरि लिह' आत्मा कें
नेह, मात्सर्ज आ सांचक इजोत सं -
तों; हम्मर जिनगीक अंतिम आस।

- प्रणव नार्मदेय
१४ फ़रवरी, २०१७.

सोमवार, 13 फ़रवरी 2017

मैथिली रचना - ३६

चुमाओन
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पहिल बेर 
जहिया धकिया देल गेलहुं अनचोके
निश्छल मनुक्खता'क शीतल छांहि सं
धर्मक धधकैत आँच लग
आ 
पारि देल गेल एकटा गोखुर जकां
'अग्नि'शिखा माथ पर;
दहकैत रहल अछि तहिए सं मोन-मस्तिष्क 
छद्म गौरबक धाह सं।
पछाति
घीचि लाओल गेलहुं 
जाति-वर्णक करिआयल खोह में
गरदानि देल गेल पाँच तानीक जुन्ना सं
संस्कार'क ना' पर
से जरैत रहल सौंसे गात
पझाइत अहं केर आगि सं;
जे खन-खन अखनहुं लहकैत अछि -
छाउर होइत समयक बीच।
पुरखाक ऋण बेमाक करबा लेल
घुमाओल गेलहुं - अग्निकुंडक चारू भ'र
हविष्य होइत रहल जिनगी'क सभटा मनोरथ
करबा लेल ताहि संबंध'क निमाह;
झरकैत रहलहुं एकहक साँस सदिखन।
जिउबा'क लेल सार्थक जिनगी
द' रहलहुं नित्तह अग्निपरीक्षा,
कहकह सुनगैत कर्तव्य पथ पर चलैत,
पयर दगाह होयबा सं बंचबाक प्रयास में;
दग्ध होइत आत्मा पर
पड़ि रहल फोंका - अविश्वासक।
से जेना कि कहैत अछि सभ,
जे करैत अछि काट -
लोहे लोह कें, माहुरे माहुर कें आकि दाहे दाह कें,
तहिना
सभ विधि-व्यवहारक संग भेंटल -
माय'क देल चुमाओनक ऊष्मा,
करैत रहल शीतल हिय कें;
जेना कि
जेठक रौद सं तप्पत मांटि कें
शीतल करैत अछि -
पुरबाक तोर संग बरसैत बुन्न।
आ आइयो
ओ सिनेह सं भरल ठोर'क स्पर्श - 
हम्मर लिलार पर,
भरि दैछ - जिजीविषा आ उत्साह,
सभ अगुरबान सहबा लेल;
जे समधानैत रहत - समय आ समाज,
जिनगी'क समर में - हमरा पर।

- प्रणव नार्मदेय 
१३ फ़रवरी, २०१७.

दिल की बातें - 43

ख़ुद को कुछ बेताब करते हैं
दिल को हम गुलाब करते हैं

आज उन पे नज़र जा ठहरी
जो कि नज़रें ख़राब करते हैं

उनकी क़ुर्बत का नशा ऐसा
वह हर शय शराब करते हैं

होगा जुर्म कहीं लेकिन हम
इश्क़ करके शबाब करते हैं

ज़िन्दगी कर आसां उनकी 
जो यूं जीना अज़ाब करते हैं

- प्रणव नार्मदेय 
०८ फ़रवरी, २०१७.

सोमवार, 9 जनवरी 2017

मैथिली रचना - ३५

ओहिना...किछुओ...

भेल मोन'क सभटा रंग जुदा
सभ छिड़ियायल संबंध मुदा
मानल जे समय छै बाम भेल
जिनगी'क अंत कहाँ होइ छै
कर्ता हिय तंग कहाँ होइ छै!

अप्पन अप्पन जिनगी सबहक
ओ स'र-समाजो'क हक़ जानल
परमार्थ कें ख़ातिर स्वार्थ तजै
किछुए में होइछ से सक मानल
तोड़य दुनियाँदारि'क प्रबंध
सभ में से ढंग कहाँ होइ छै!
कर्ता हिय तंग कहाँ होइ छै!

ककरो अछि लोभ अलेल धन'क
कियो मान'क मोह सं रहय भरल
कत्तहु मन में भरि छाक घृणा
कियो सदति नेह कें संग चलल
अछि सबह'क संग स्वार्थ किछुओ
ओहिना कियो संग कहाँ होइ छै!
कर्ता हिय तंग कहाँ होइ छै!

कियो बरू नीक-बेजाय बुझय
किछु लोक सत्त कें संग रहल
जतबा अंदर ओतबहि बाहिर
अभिनय ओ कोनो कहाँ कयल
मुँह देखि देखि मुंगबा बांटय
सभ के से भंग कहाँ होइ छै!
कर्ता हिय तंग कहाँ होइ छै!

धरती पर पयर कहाँ राखय
कनियो आगां जं लोक बढ़ल 
मानल एहने अछि लोक बेस
किछु त' एहनो हम लोक देखल
कतबो ओ ऊँच चढ़य सीढ़ी 
मुदा मोन मतंग कहाँ होइ छै!
कर्ता हिय तंग कहाँ होइ छै!

अन्हर, कारी दुख सन बदरी
आ झिहिर-झिहिर साओन बरसल
पीयर ढाबुस संग चास हरित
पनिसोखा'क सातों रंग सजल
अछि रंग-बिरंग'क ई दुनियाँ 
एक्कहि टा रंग कहाँ होइ छै!
कर्ता हिय तंग कहाँ होइ छै!

- प्रणव नार्मदेय 
०९ जनवरी, २०१७.

चित्र साभार: गूगल इमेजेज़