शनिवार, 9 जुलाई 2016

दिल की बातें -34

कुछ लोग जो माहताब होते हैं
देते ठंडक ग़रचे बेआब होते हैं

जलके रौशन जहान को करते 
वही तो यहाँ आफ़ताब होते हैं 

सुकूं की नींद उन्हें नसीब कहाँ 
जिनके आँखों में ख़्वाब होते हैं

काँटों के दरमियाँ होते अक्सर
वो जिनके दिल गुलाब होते हैं 

चोट खाकर भी उफ़ नहीं करते
वो लोग बड़े लाजवाब होते हैं

जिनके अंदाज़ फ़क़ीराना देखे
अक्सर दिल के नवाब होते हैं

उन शिकवों को दरकिनार रखें
कि जिनसे दिल ख़राब होते हैं

चल ख़्वाबों को मेयार पे परखें
वरना कुछ सपने सराब होते हैं

सवाल जो ना हमसे हल होते
वक़्त ही उनका जवाब होते हैं

- प्रणव कान्त झा
०९ जुलाई, २०१६.

चित्र साभार: गूगल इमेजेज़

रविवार, 3 जुलाई 2016

दिल की बातें - 33

उफ़्फ़ ये ख़ामोशी ना मार डाले किसी को
उस पर यह सितम हैं रूठ जाते वो झट से

ना असरपा रही थीं जिन दिलों पर सदाएं
वो दिल किस तरह से रो दें उनके ख़त से

ना ख़ुश रख पाए हम जिन्हें जां देकर भी
वह जहां हंस पड़ा देखो उनकी इशरत से

बड़ी कोशिशें की, ना मिला रंग ए इश्क़ां
है धनक कैसे बिखरा उनकी ख़जालत से

एक रिश्ता बाँधने में इश्क़ कम पड़ रहा है
हैं सारा जहां बाँधतीं वह ज़रा एक लट से

- प्रणव कान्त झा
०३ जुलाई, २०१६.