कतहु
पेटक आगि नहीं मिझाय,
तs
कतहु
'तलब'केर अंगार जागल अछि.
कतहु
चुबैत नोर भीजल आँखि सं,
तs
कतहु
'आसव'केर धार लागल अछि.
हमरा लगैत अछि,
आई कतेको गरीबक नेना कें
भुखले सूतय पड़त.
कियैक तs
'मिल'क आगाँ, दारूक भठ्ठी पर
नमहर 'कतार' लागल अछि.
अखबार में पढ़ल खबरि कें मोन पारैत,
की जाने, केहन-केहन सपना आओत?
छत पर टाँगल पंखा कें निहारैत,
लगैत अछि भोरे भs जायत.
हमरा लगैत अछि,
आई एकटा माय, राति भरि करौटे फेरतीह,
बेटी फोन कयने छलन्हि,
'आई राति आबय काल अबेर भs जायत.'
आई-काल्हि,
किछु सहमैत-डेरायल लोक सभ
छत पर दियरि सजबैत छथि,
किछु भीड़ सं बचैत-बचाबैत
बज़ार दिशि जाईत छथि.
हमरा लगैत अछि,
काल्हि शहर में 'कर्फ्यू' लागत अबस्स,
अहि बेर ईद आ दिवाली
संगहि जे अबैत अछि.
हिंदी सं अनुवाद: प्रणव कान्त झा. २७ फ़रवरी, २०१३.
पेटक आगि नहीं मिझाय,
तs
कतहु
'तलब'केर अंगार जागल अछि.
कतहु
चुबैत नोर भीजल आँखि सं,
तs
कतहु
'आसव'केर धार लागल अछि.
हमरा लगैत अछि,
आई कतेको गरीबक नेना कें
भुखले सूतय पड़त.
कियैक तs
'मिल'क आगाँ, दारूक भठ्ठी पर
नमहर 'कतार' लागल अछि.
अखबार में पढ़ल खबरि कें मोन पारैत,
की जाने, केहन-केहन सपना आओत?
छत पर टाँगल पंखा कें निहारैत,
लगैत अछि भोरे भs जायत.
हमरा लगैत अछि,
आई एकटा माय, राति भरि करौटे फेरतीह,
बेटी फोन कयने छलन्हि,
'आई राति आबय काल अबेर भs जायत.'
आई-काल्हि,
किछु सहमैत-डेरायल लोक सभ
छत पर दियरि सजबैत छथि,
किछु भीड़ सं बचैत-बचाबैत
बज़ार दिशि जाईत छथि.
हमरा लगैत अछि,
काल्हि शहर में 'कर्फ्यू' लागत अबस्स,
अहि बेर ईद आ दिवाली
संगहि जे अबैत अछि.
हिंदी सं अनुवाद: प्रणव कान्त झा. २७ फ़रवरी, २०१३.
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