वो कहते हैं
अल्लाह के लिए
ही तो
उनकी जान है.
तुम कहते हो
भगवान् को ही
अर्पण
तुम्हारा प्राण है.
मैं कहता हूँ
वाक़ई, अगर
वो अल्लाह है
और
ये भगवान् हैं
तो
तुम दोनों ही से
उनका इम्तिहान है.
तुम
अगर भगवान् के लिए
अपने
प्राण दे ही दो.
वो
अगर अल्लाह के लिए
किसी की
जान ले ही लें.
मैं सोचता हूँ,
कैसा वो अल्लाह
और
कैसा ये भगवान् है?
अगर
हिंसा और दहशत
दोनों ही
इनके उन्वान हैं.
वाक़ई
जैसा कि
वो कहते है;
बस अल्लाह का कहा
वो करते हैं
और
जैसा कि
तुम कहते हो
भगवान् का कहा ही
तुम मानते हो.
वाक़ई
तुम्हारी मान्यताएं
और
उनके कर्म ही
अगर
भगवान् और अल्लाह की
पहचान हैं.
तो
मैं समझता हूँ
शुक्र है कि
ना वो मेरा अल्लाह है
और
ना ये मेरे भगवान् हैं
कि
जिनके
होने के सदके
इन्सान और इंसानियत
दोनों ही
परेशान हैं.
प्रणव कान्त. २९ जनवरी, २०१३.
अल्लाह के लिए
ही तो
उनकी जान है.
तुम कहते हो
भगवान् को ही
अर्पण
तुम्हारा प्राण है.
मैं कहता हूँ
वाक़ई, अगर
वो अल्लाह है
और
ये भगवान् हैं
तो
तुम दोनों ही से
उनका इम्तिहान है.
तुम
अगर भगवान् के लिए
अपने
प्राण दे ही दो.
वो
अगर अल्लाह के लिए
किसी की
जान ले ही लें.
मैं सोचता हूँ,
कैसा वो अल्लाह
और
कैसा ये भगवान् है?
अगर
हिंसा और दहशत
दोनों ही
इनके उन्वान हैं.
वाक़ई
जैसा कि
वो कहते है;
बस अल्लाह का कहा
वो करते हैं
और
जैसा कि
तुम कहते हो
भगवान् का कहा ही
तुम मानते हो.
वाक़ई
तुम्हारी मान्यताएं
और
उनके कर्म ही
अगर
भगवान् और अल्लाह की
पहचान हैं.
तो
मैं समझता हूँ
शुक्र है कि
ना वो मेरा अल्लाह है
और
ना ये मेरे भगवान् हैं
कि
जिनके
होने के सदके
इन्सान और इंसानियत
दोनों ही
परेशान हैं.
प्रणव कान्त. २९ जनवरी, २०१३.
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