हे हम्मर गामक पुरनी पोखरि
पोखरि भीड़क बुढ़बा पीपरि
अछि तोहरा नित शत बेरि नमन.
तोहरे छाहरि में खेला-धुपा
नवजुआन भेल कतेको बचपन,
तोहरे साक्षी कय कर्मक बल
बूढो सभ करथि स्वर्गगमन.
तोहरे झोंझरि में सांझ-भोर
चिड़ियों चुनमुनि करय गुंजन,
दियरि जरा गामक ललना सभ
भावी के करथि शुभकल्पन.
थाकल-मारल जं बाट-बटोही
पावथि तोहर सिहकैत पवन,
आल्हा-सलहेसक तान धरथि
बिसरि अप्पन दिन भरिक थकन.
गामक एका केर कल्पतरु
तों छलाह सिनेहक क्रीडांगन,
गामक मान-पहरुआ तों
फेर भेल कोना ई अधोगमन?
आई गाम बनल अछि कुरुक्षेत्र
दुर्योधन अछि केओ दु:शासन,
आ धर्मराज अछि बौक बनल
कय रहल हारि परदेस गमन.
मानवता कें पहचान बिसरि
किछु सोल्हकन आ किछु बाभन,
अछि खंड-खंड पाखण्ड भरल
मनुक्खक लेल नहि कतहु शरण.
सोदरो में नित रगड़ा-झगड़ा
चंहुदिशि भ रहल बिक्खबमन,
मुँह मोड़ने बैसल नीलकंठ
भयभीत करय सं गरलशमन.
हे पीपरिक गहबर कें ब्रह्मपिंड
तोहरा छह हमरो आत्मार्पण,
बस एक बेरि तों फिरा दहक
तोहर छाहरि, हम्मर नेनपनि,
सम्मतिक बहय फेरि वैह पवन
फेरि करह नेह केर प्रत्यर्पण.
हे हम्मर गामक पुरनी पोखरि,
पोखरिक भीड़क बुढ़बा पीपरि,
दुहु कें कोटिशःअभिनन्दन.
प्रणव कान्त. 01 नवम्बर, 2005.
पोखरि भीड़क बुढ़बा पीपरि
अछि तोहरा नित शत बेरि नमन.
तोहरे छाहरि में खेला-धुपा
नवजुआन भेल कतेको बचपन,
तोहरे साक्षी कय कर्मक बल
बूढो सभ करथि स्वर्गगमन.
तोहरे झोंझरि में सांझ-भोर
चिड़ियों चुनमुनि करय गुंजन,
दियरि जरा गामक ललना सभ
भावी के करथि शुभकल्पन.
थाकल-मारल जं बाट-बटोही
पावथि तोहर सिहकैत पवन,
आल्हा-सलहेसक तान धरथि
बिसरि अप्पन दिन भरिक थकन.
गामक एका केर कल्पतरु
तों छलाह सिनेहक क्रीडांगन,
गामक मान-पहरुआ तों
फेर भेल कोना ई अधोगमन?
आई गाम बनल अछि कुरुक्षेत्र
दुर्योधन अछि केओ दु:शासन,
आ धर्मराज अछि बौक बनल
कय रहल हारि परदेस गमन.
मानवता कें पहचान बिसरि
किछु सोल्हकन आ किछु बाभन,
अछि खंड-खंड पाखण्ड भरल
मनुक्खक लेल नहि कतहु शरण.
सोदरो में नित रगड़ा-झगड़ा
चंहुदिशि भ रहल बिक्खबमन,
मुँह मोड़ने बैसल नीलकंठ
भयभीत करय सं गरलशमन.
हे पीपरिक गहबर कें ब्रह्मपिंड
तोहरा छह हमरो आत्मार्पण,
बस एक बेरि तों फिरा दहक
तोहर छाहरि, हम्मर नेनपनि,
सम्मतिक बहय फेरि वैह पवन
फेरि करह नेह केर प्रत्यर्पण.
हे हम्मर गामक पुरनी पोखरि,
पोखरिक भीड़क बुढ़बा पीपरि,
दुहु कें कोटिशःअभिनन्दन.
प्रणव कान्त. 01 नवम्बर, 2005.
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