शुक्रवार, 23 दिसंबर 2016

मैथिली रचना - ३१

संक्रमित संबंध
***************

किछु संबंध भ' जाइछ -
जिनगी'क नहसूर;
जं गड़ि जाय मोन में 
अहं आकि अविश्वास'क खैंक
आ 
नहि निकालल जाय ओकरा
समय अछैत।
भ' जाइछ -
संवादहीनता'क पकोई;
भरि जाइत अछि -
अवसाद, ईर्खा, अविवेक आ घृणा'क पीज,
जं नहि हो इलाज एकर -
धैरज, विवेक आ सिनेह'क औखधि सं।
कैयक बेरि
अबडेरि देल जाइछ -
उचित संवाद'क मलहम-पट्टी कें
भ' जाइत अछि ई मारुक;
संक्रमित कर' लगैत अछि -
जिनगी'क देह कें।
अहि सं पहिने कि
होमय लागय आनों संबंध संक्रमित
आकि
मरय लागय जिनगी'क सभ सपना आ जिजीविषा 
अहि संक्रमण सं;
कोनो बेजाय नहि जे भ' जाइ बरु फराक -
ओहि संक्रमित संबंध सं।
जेना कि काटि देब' पड़ैछ -
असाध कैंसर सं संक्रमित अंग
ककरो देह सं;
जिउबा'क आस में।
आख़िर 
एकटा संबंध'क किम्मति पर
कोना मारल जा सकैछ -
जिनगी'क सभटा संबंध आ सपना!

- प्रणव नार्मदेय
२४ दिसंबर, २०१६.


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें