गुरुवार, 15 दिसंबर 2016

मैथिली रचना - २९

एकटा प्रश्न
************

औ जी,
एकटा प्रश्न पूछू?
पुछबा सं पहिने पूछि लेलहुं;
कारण,
जे आइ-काल्हि
प्रश्न पूछ' पर सेहो
उठि रहल अछि प्रश्न!
जं तैयो
पुछिए लेल आहां,
त' रहब तैयार
जे उत्तर में दागल जा सकैछ - प्रतिप्रश्न।
ओना,
की कहैत छी?
जं पूछल नहि जाय
तं
प्रश्न की रहत नहि?
ई प्रश्न त'
प्रश्न बनि ठाढ़ रहबे करत!
से 
जं मुँह नहि त' आँखि पूछत,
जं शब्द नहि त' भाव पूछत,
आ जं लोक नहि,
तखन आत्मा त' पुछबे ने करत प्रश्न?
तैं त' मोन कहलक,
पुछिए ली अहीं सं जे
की बिनु प्रश्ने -
आहां पहुंचल जतय,
से होइत कहियो संभव?
नहि ने!
त' फेरि आइ कियैक भ' गेल अछि,
प्रश्न पूछब - अक्षम्य अपराध?

- प्रणव नार्मदेय
१४ दिसंबर, २०१६.

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें