दिल पहलू में लिए फिरते यहाँ सब
सबकी बातों का यहाँ मत पास देना
लोग मतलब से क़रीब आते अक्सर
यों ही किसी को न अपना हाथ देना
बार-बार आएँगे क़रीब ज़माने के ग़म
थामे हँसी का दामन उनको मात देना
क़ुर्बां हुई हैं रातें मेरी आँसुओं के संग
देखना तुम इनको न अपनी रात देना
हम तो किए वादे निभाएँगे हद तक
तुम ख़ुद से ख़ुद का सदा साथ देना
- प्रणव कान्त झा
०९ जून, २०१६.
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