मंगलवार, 7 जून 2016

दिल की बातें - 29

इश्क़ रूहानी तुम्हें पता ही नहीं
मैं कहाँ इश्क़ ए फ़ानी चाहता हूँ 

फ़र्ज़ी अफ़साने बड़े फैले हैं यहाँ 
मैं कोई सच्ची कहानी चाहता हूँ 

बात कुछ तो हो तेरे-मेरे दरमियाँ 
कहां मैं कोई बदग़ुमानी चाहता हूँ 

सर्द से पड़ रहे जज़्बात हर तरफ़ 
अब रग़ ए ख़ूं में रवानी चाहता हूँ 

ज़रूरतें अपनी मैंने महदूद रक्खीं 
सफ़र में ज़रा आसानी चाहता हूँ

दिल की बातें ना इस शहर में करो
नहीं मसला कोई तूफ़ानी चाहता हूँ 

- प्रणव कान्त झा
०८ जून, २०१६. 


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