बुधवार, 18 मई 2016

मैथिली रचना - १५

'विश्व मातृ दिवस' पर संसार'क सभ माय कें अहि अकिंचन पूत'क हिय सं नमन! आहां सभ'क बिनु अहि सगरो संसार'क कल्पनो नहि कयल जा सकैछ। मानवता सदिखन आहां सभ'क अनुगृहीत अछि। 

अकास'क ऊँचाई,
समुद्र'क गहींराई,
धरती'क विशालता,
फूल'क कोमलता,
नदी सन सरलता,
ओस सन शुद्धता,
सुरुज सन प्रखरता,
चान सन शीतलता,
बर्फ़ सन उज्जवलता,
शशक सन निश्छलता
गऊ सन वात्सल्य 
प्रकृति'क ममत्व
ई सभ जं कत्तहु एकठाम भेंटि जाय
त' बुझु आओर कियो नहि, 
ओ होयतीह - माय.

- प्रणव कान्त झा
८ मई, २०१६.

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