शनिवार, 28 मई 2016

दिल की बातें - 22

मेरे दर्द से गर दवा हो किसी की
दुआ में ज़रा सा मैं और दर्द माँगूँ

अगर आह मेरी सुकूं दे किसी को
तो ये फ़र्ज़ मुझको और दर्द माँगूँ

सबकी ख़ुशी से मेरा ग़र्ज़ है दिल
कि सबकी ख़ुशी को मैं दर्द माँगूँ

मेरे दिल की ज़र्दी बने तेरी सुर्ख़ी
तो दिल ज़र्द हो, इतना दर्द माँगूँ 

मेरी मौत ही गर ख़ुशी हो तेरी तो
मर जाऊँ हंस कर इतना दर्द माँगूँ 

- प्रणव कान्त झा
२९ मई, २०१६.

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