मंगलवार, 31 मई 2016

दिल की बातें - 26

इक मेरा मिज़ाज सह नहीं पाते
मेरे दर्द सर लेने की बात करते हैं 

मेरी सदाएं जिन तक नहीं पहुँची 
दिल तक पहुँचने की बात करते हैं

ख़ुद को ही जो समझ न पाएँ वो
मेरा मन समझने की बात करते हैं

कि जो क़दम भटक रहे हैं अब तक
मेरे रुह को थामने की बात करते हैं

चलो दिल तुम भी देख लो उनको
तुमसे किस किस की बात करते हैं

उन दिलों को कब सुकून देगा रब
जो न मिलना उसी की बात करते हैं

- प्रणव कान्त झा
३० मई, २०१६.

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