सनेस
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जुनि सोचब ई प्रश्न जे औखन
ह'म कतय आ आहां कतय
भाव-सोच स' जं एक रहब सभ
फेरि व्यर्थ प्रश्न जे के कतय
कतहु रही आ कहुना रही मोदा
ई अखियास औ मीत रहय
माय मैथिली सन हित-मीत नहि
सदति सभ'क ई मोन बसय
गौरब बरु सभ अतीत पर राखब
ई समय, कर्म सेहो मोन रहय
आजु'क कर्महि सं महल बनत ओ
संतति अतीत जे स्मरण करय
बांटल खंडित-खंडित जे सभ कियो
होयब से एक कहिया आ कतय
बिनु एका'क हो उदय नहि किन्नहुं
ई सत्य सदति अखियास रहय
सभ भूल-चूक, लेनी-देनी कें बिसरि
संग चली आ'ब संकल्प रहय
रहत जं कर्म-भाव-आत्मा पवित्र त'
भेंटत सदिखन उद्देश्य अभय
- प्रणव कान्त झा
२९ जुलाई, २०१६.
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