सोमवार, 26 सितंबर 2016

मैथिली रचना - २२

मोन'क कोन सं
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चहु दिशि देखू मनुख मनुख कें मारि रहल अछि
स्वार्थ'क आगां आब मनुक्खता हारि रहल अछि 

नैतिकता आब राखल गेल पोथी में चौंपेति क'
जग तकरे तर्पण लेल गंगाजल ढारि रहल अछि

ढंग पुरनका क'हल जेतै सगरो लोक लाज कें
देखि क' चालनि सूप हिया परचारि रहल अछि

तागल छल ई समाज संबंध'क जाहि सूत सं  
नित दिन तकरे माँझ चौबट्टी जारि रहल अछि

सत्य धर्म नेह'क सभ जे गोड़ल'क पाताल में
से विकास'क झंडा चान पर गाड़ि रहल अछि

जकरे जिम्मेदारी भेटल जग के राह देखाब' कें
सभकें भटका क' ओ निज कें तारि रहल अछि

सदति बनौल'क धर्म नीति जग लोक रीति कें 
से धर्महि देखी जं लोकबेद कें मारि रहल अछि 

पूजे टा लेल बैसल छथि राम त' बूझू मंदिर में 
रावण'क समतूले जग काज सुतारि रहल अछि

अदौकाल सं माँ मैथिली सीबय जाहि फांट कें  
संतान सभ तकरे देखू नित्तहि फाड़ि रहल अछि

ई राति रोकय भरिसक भोरु'क नब किरिन कें
किछु दीप तैयो आस'क टेमी बारि रहल अछि

- प्रणव कान्त झा
२७ सितम्बर, २०१६.


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