मोन'क कोन सं
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ई जे नबरंग'क संसार भेलै से की करबै
आन्हर-बहीर राजा भ गेलै से की करबै
सब धान बाइस पसेरी सगरो तौल रहल
रिति विचित्र सरिपहुं भेल एत्तै की करबै
राकस पहिरन बदलि सगर दुनियाँ घूमय
आब सन्यासी ब्योपार जुमाबै की करबै
यौ प्रजातंत्र में नबका रजबाड़ा देखलहुं
फेर घरही युवराजो देखबै त' की करबै
अपटी खेत में रक्षक जान गमाबैत अछि
आ मगरमच्छ सभ नोर गिराबै की करबै
कांकोड़ सन अपन'हिक टाँग घिचैत रहू
कुकुर-बिलाड़ि आँखि देखाबै की करबै
सुपथ गप्प जं बजलहुं, हैत जहल बौआ
गामो रावणे'क जयकारा चाहै की करबै
सभटा छुतहर घैल त' भांगठे भेल छलैक
आब नबको बासन छुतहा भेलै की करबै
हारू हिय जुनि हेतै किछु परिवर्तन संगी
किछु समये जं बेपरीत भेलै से की करबै
- प्रणव कान्त झा
२१ सितम्बर, २०१६.
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