अपनी मिट्टी के कण-कण को
अपने जीवन के क्षण-क्षण से
उपकृत कर गए हे कृतज्ञ पुत्र
हम शोक क्यों करें!
अपने जीवन के क्षण-क्षण से
उपकृत कर गए हे कृतज्ञ पुत्र
हम शोक क्यों करें!
थे मानव, अपनी क्षमता का
संपूर्ण प्रयोग कर मानव हित
हो गए सिद्ध तुम महाप्राण
हम शोक क्यों करें!
संपूर्ण प्रयोग कर मानव हित
हो गए सिद्ध तुम महाप्राण
हम शोक क्यों करें!
हर भेद भाव से ऊपर उठ
जीवन जीता कैसे मनुष्य
यह सिखा गए आदर्श पुरुष
हम शोक क्यों करें!
जीवन जीता कैसे मनुष्य
यह सिखा गए आदर्श पुरुष
हम शोक क्यों करें!
बच्चों सी निश्छलता भर कर
हो बाल हृदयों में आरोपित
बन गए प्रतिछाया लक्ष-लक्ष
हम शोक क्यों करें!
हो बाल हृदयों में आरोपित
बन गए प्रतिछाया लक्ष-लक्ष
हम शोक क्यों करें!
यौवन सा ऊर्जा लेकर तुम
सपने दे गए युवा जन को
सपनों संग तुम भी जीवित
हम शोक क्यों करें!
सपने दे गए युवा जन को
सपनों संग तुम भी जीवित
हम शोक क्यों करें!
प्रकृति प्रदत्त तुम उपहार
प्रकृति सरीखा जीवन जी
हो गए समाहित प्रकृति में
हम गर्व ना करें!
प्रकृति सरीखा जीवन जी
हो गए समाहित प्रकृति में
हम गर्व ना करें!
- प्रणव कान्त झा
२८ जुलाई, २०१५.
२८ जुलाई, २०१५.
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