रिश्तों में
'स्पेस'
अब बहुत
मायने रखता है।
पर
जब
तुम करती हो
'स्पेस' की बात
तो
बनती हो - क्रान्तिकारी और जुझारू
और
ग़र मैं तलाशता हूँ
'स्पेस'
तो
बनता हूँ - अत्याचारी, व्यभिचारी।
फ़िर
हो जाता है
मेरे लिए मुहाल
ज़िन्दगी का
'पेस' और 'पीस'।
'स्पेस'
अब बहुत
मायने रखता है।
पर
जब
तुम करती हो
'स्पेस' की बात
तो
बनती हो - क्रान्तिकारी और जुझारू
और
ग़र मैं तलाशता हूँ
'स्पेस'
तो
बनता हूँ - अत्याचारी, व्यभिचारी।
फ़िर
हो जाता है
मेरे लिए मुहाल
ज़िन्दगी का
'पेस' और 'पीस'।
- प्रणव कान्त झा
१६ जुलाई, २०१५.
१६ जुलाई, २०१५.
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