गुरुवार, 9 जुलाई 2015

मैथिली रचना - ४

खंड-खंड भेल मोन
खंड-खंड - बिस्वास
खंड-खंड - घ'र-आँगन
खंड-खंड - आस 
खंड-खंड भेल गाम

खंडित होयबाक छल जकरा
ओ अछि
अखण्ड -
पाखण्ड,
प्रचण्ड -
ईर्ष्या।
आब
आनह कतहुँ सं एकटा -
'नेमिचंद'
जे
खंड-खंड 'कबाड़ो' सं
बसाबथि
सुन्दर, कालजयी संसार।
- प्रणव कान्त झा
०७ जुलाई, २०१५.

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