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बीत गेल-
ईहो सुकराती।
पछिला
किछु बरख सं
लाधल रहैछ गुजगुज अन्हरिया-
अनिश्चितता'क।
कखनहुं
बहय लगैछ अन्हर-बिहाड़ि-
घृणा आ अवसाद'क।
जे
सरिपहुं लगाबैछ
अप्पन समुच्चा ज़ोर
मिझा देबा'क लेल;
पुरखा सं जोगाओल/जराओल-
नेह'क दीबा-बाति कें।
मोदा
कतबहु बरजोर
होमय
ई घोर अन्हरिया राति
किछु टेमी आस'क
तैयो जरैत अछि-
ता'धरि;
जा'धरि नहि होइछ-
एकटा न'ब बिहान
आ कि
नहि होइछ उग्रास-
प्रखर सुरुज'क;
न'ब नेहकिरिन संग।
- प्रणव नार्मदेय
०२ नवम्बर, २०१६.
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