सोमवार, 7 नवंबर 2016

मैथिली रचना - २५

व्यवस्था
********

जिनका 
होयबा'क छल -
कमल'क फूल सन सौम्य,
गुलाब'क फूल सन महमह
आकि
अड़हुल'क फूल सन गुनगर
से
भेल छथि -
कनैल'क फूल।
बरु
रंग जतेक होन्हि -
चोख; आँखि चकचौन्ह करयबला,
मोदा
डारि, पात होइ
कि
शिरा में बहैत द्रव;
अंतर'क गुण माहुरे सन घाती।
से 
होउन्ह कोना नहि?
जाहि सं पनघला
बीयो त'
अछि बिक्खे भरल ने?
ओना 
जे होई
लोक त' औखन
चोन्हियाएल अछि -
फूल'क चोखगर रंग सं।
जेना
काल्हि तक छल -
बेमत्त,
धथूर'क फूल सूंघि
आकि
ओकर बीया चीखि।
छी
पड़ल छगुन्ता में,
की कहिबै एकरा -
व्यवस्था'क भटरूप
आकि
भटरूप'क व्यवस्था!

- प्रणव नार्मदेय
०६ नवम्बर, २०१६.

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें