बुधवार, 30 नवंबर 2016

दिल की बातें - 40

रग़ों के दौड़ते ख़ूं में उबाल आएगा
हम चुप रहें तो भी सवाल आएगा

ख़्वाह बन्द कर दो उठती आवाज़ें 
ख़ामोशियों से भी बवाल आएगा

सबके जज्बों को क़ैद कर बेशक
आज ख़ुश हो पर मलाल आएगा

तिरे ज़ुल्म से हैं जो दरहम-बरहम
उनके चेहरों पे भी जमाल आएगा

हो कितना भी रसूख़ ज़ालिम का
पर ज़ुल्मों का भी जवाल आएगा

आँसू नहीं ये, ऐसे राख़ हैं जिनमें 
दबे अंगारों में ही जलाल आएगा

रात कैसी भी हो सियह औ' लंबी
उजाला दिन का बहरहाल आएगा

जहाँ थे तुम कल वां आज है कोई
ना समझे गर वो ही काल आएगा

वक़्त ने तेरी भी क़ाबिलियत देखी
बंदा फिर कोई बाक़माल आएगा

हम रहें ना रहें पर देखना इक दिन
तुम्हें इन बातों का ख़याल आएगा

- प्रणव नार्मदेय 
३० नवम्बर, २०१६.

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