सोमवार, 31 अगस्त 2015

मैथिली रचना - ६

अप्पन
माटि सं
उखरल छी बेबस
जड़ि मोदा
संग लागल अछि।
से
समय बरू
कत्तहु पटकय,
परिजन-पुरजन
कतबहु झटकय,
जौखन भेटत
कनिको
हवा-पानि;
पुन: जीबि-उठि,
चतरि-पसरि
ओत्तहि
फुलाय लागब
थेथर'क फूल जकां।
- प्रणव कान्त झा
३१ अगस्त, २०१५.

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