'हे हौ!
भाग जे बदलत
से कोना?
हमरा आऊर कें त'
कुरहरि-कोदारि पारैत
भाग'क रेखे मेटा
जाइ है तरहत्थी सं' -
बाजल रहय
ओ अधबयसू किसान
सन'क जउर घोरैत।
चोट्टहि बाजल
कोदारि'क बेंट में गुल्ली ठोकैत
नबजुआन छौंड़ा -
'एह बाबू,
जे हाथ कुरहरि-कोदारि पारत
से कि तरहत्थी'क रेखक' भरसबे
काटत जिनगी!
आ कि घाम चुआ,
बांहिक' जोरे,
बज्जरो चास के छाती चीरि
पारत अप्पन भाग'क रेख अपनहि!'
मोंछ'क पम्ह सं चुबैत
घाम पोंछि,
कोदारि कें कन्हेठि,
चलि देलक ओ बाध दिस
कोनो नबका सिनेमा के तान टेरैत
आ
देखैत रहलै ओकर पिता
किछु छोह सं आ किछु नेह सं
जा धरि ओझल नहि भलैक नजरि सं बेटा।
भाग जे बदलत
से कोना?
हमरा आऊर कें त'
कुरहरि-कोदारि पारैत
भाग'क रेखे मेटा
जाइ है तरहत्थी सं' -
बाजल रहय
ओ अधबयसू किसान
सन'क जउर घोरैत।
चोट्टहि बाजल
कोदारि'क बेंट में गुल्ली ठोकैत
नबजुआन छौंड़ा -
'एह बाबू,
जे हाथ कुरहरि-कोदारि पारत
से कि तरहत्थी'क रेखक' भरसबे
काटत जिनगी!
आ कि घाम चुआ,
बांहिक' जोरे,
बज्जरो चास के छाती चीरि
पारत अप्पन भाग'क रेख अपनहि!'
मोंछ'क पम्ह सं चुबैत
घाम पोंछि,
कोदारि कें कन्हेठि,
चलि देलक ओ बाध दिस
कोनो नबका सिनेमा के तान टेरैत
आ
देखैत रहलै ओकर पिता
किछु छोह सं आ किछु नेह सं
जा धरि ओझल नहि भलैक नजरि सं बेटा।
- प्रणव कान्त झा
१८ अगस्त, २०१५.
१८ अगस्त, २०१५.
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