दिल को हम गुलाब करते हैं
आज उन पे नज़र जा ठहरी
जो कि नज़रें ख़राब करते हैं
उनकी क़ुर्बत का नशा ऐसा
वह हर शय शराब करते हैं
होगा जुर्म कहीं लेकिन हम
इश्क़ करके शबाब करते हैं
ज़िन्दगी कर आसां उनकी
जो यूं जीना अज़ाब करते हैं
- प्रणव नार्मदेय
०८ फ़रवरी, २०१७.
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