ओहिना....किछुओ....
आजु हे सखि
श्याम अओता
डाकल काग समाद हे
सुनह, आबह
हरखित मोन मोर
करह सोरहो सिंगार हे!
विरह कें दिन
बीतल हे अलि
आब जागल भाग हे
छल जे भासल
दुखित मोन मोर
मुदित गाओत राग हे!
नेह गोदल
मनहि हम सखि
नांओं गोदह भरि हाथ हे
नेम-व्रत हम
कयल सदिखन
संग रहथि मोरा नाथ हे!
- प्रणव कान्त झा
१० जनवरी, २०१६.
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