जुदा जो तुझसे हूँ तो दर्द बहुत है दिल में
साथ होने की भी क़ीमत तो सज़ा जैसी है।
साथ होने की भी क़ीमत तो सज़ा जैसी है।
तेरी हंसी, ये समझ रुह का वुज़ू है मेरे
तेरे आँसू, मेरी इबादत में क़ज़ा जैसी है।
तेरे आँसू, मेरी इबादत में क़ज़ा जैसी है।
मैं तो काफ़िर, है तुझे जो ईमां तो समझ
कि ये जुदाई भी ख़ुदाई की रज़ा जैसी है।
कि ये जुदाई भी ख़ुदाई की रज़ा जैसी है।
- प्रणव कान्त झा
१८ अक्तूबर, २०१५.
१८ अक्तूबर, २०१५.
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