मंगलवार, 22 सितंबर 2015

दिल की बातें - 7

ये जो नसीहत दर नसीहत दे रहे हो
तो कभी मेरी जगह आकर ही देखो।

है मुझे हर पल यक़ीं इंसानियत पर
ये ईमां तुम भी ज़रा लाकर ही देखो।

नहीं आसां करना किसी पर ऐतबार
जिगरवाले हो, आज़मा कर ही देखो।

जो लगतीं ख़्वाबों की बातें अज़ीज़ी
बस इक ख़्वाब तुम पाकर ही देखो।

- प्रणव कान्त झा
२३ सितम्बर, २०१५

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