शनिवार, 26 मार्च 2016

दिल की बातें -19

तेरे रंग थे जो मुझे रंग गए
थी तेरी अदा भी संवर गई

ना वो हम रहे ना वो तुम रहे
इक ख़ुमार थी जो उतर गई

कोई बात थी जो दरमियाँ 
वो बनी नहीं सो बिगड़ गई

सरेराह थी जो कोई रौशनी
हुई वो सियह जो नज़र गई

वो जो दिन थे अब ख़्वाब हैं
वो जो उम्र थी वो गुज़र गई

- प्रणव कान्त झा
२४ मार्च, २०१६.

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