मंगलवार, 5 फ़रवरी 2013

आउट ऑफ़ डेट

बदल रहा है सबकुछ
इस नए संसार में,
विकास की सीढियां तय करते
हम पहुँच चुके हैं - इक्कीसवीं सदी के द्वार पर.
परिवर्तन की क्रांति ने
बदल दीं हैं - सारी मान्यताएं,
सभी धारणाओं को.
इस क्रांति ने;
बदल दीं हैं-
हमारी जीवन शैली एकदम से,
अपनाई है हमने एक नई शैली-
आधुनिकता, मॉडर्नाइजेशन.
नयेपन की चमक से
चौंधियाई आँखें हमारी,
दिखा रहीं हैं राह-
अपने नौनिहालों को यही.
और दे रहे हैं धरोहर
हम उन्हें-
हाय-हेलो की संस्कृति का
क्योंकि बनाना चाहते हैं
हम उन्हें-
मॉडर्न; बिलकुल अपनी तरह.
अपने गौरवमय इतिहास,
परिष्कृत संस्कृतियों,
प्रातःस्मर्णीय महापुरुषों,
सुरुचिपूर्ण कलाओं,
श्रेष्ठ साहित्यों
एवं
उच्च आदर्शों को
भूल चुके हम,
'आउट ऑफ़ डेट' कह कर.
क्या कभी सोचा हमने,
क्या करेंगे हम जब
कल को हमारे ही बच्चे
कहेंगे हमसे,
ओह पापा! यू'र आउट ऑफ़ डेट नाउ.

प्रणव कान्त, 28 अगस्त,1996.

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